गाँव की गोरी की चूत चुदाई (Ganv Ki Gori Ki Chut Chudai)



loading...

मेरे ठरकी दोस्तों, ये desi sex story बहुत ही शानदार है। मैं टीचर की जॉब छोडके एक नौकरानी बन गयी क्योंकि उसमे ज्यादा पैसे मिल रहे थे। पर मुझे पैसो के अलावा बहुत कुछ मिला। सारे सुख, तन, मन और धन। पढ़िए मेरा सेक्सी सफ़र और साथ में मुठ ज़रूर मारना, मुझे अच्छा लगेगा-

——————————————–

मैं अभी २८ की हूँ। मेरे पति का स्वर्गवास हुए १ साल हो गया था। वो एक दुर्घटना में चल बसे थे। मैं एम ए पास हूँ। एक प्राईवेट स्कूल में टीचर थी लेकिन वेतन बहुत ही कम था।

उन्हीं दिनो मेरे एक सहयोगी ने बताया कि सेठ विक्रम के यहाँ एक घर की देखभाल के लिये एक महिला की जरूरत है। मैं उनसे जा कर मिल लूं, वो अच्छी तनख्वाह देंगे। बस उन्हें यह मत बताना कि ज्यादा पढ़ी लिखी हो।

मैं सेठ विक्रम के यहां ७.३० बजे ही पहुंच गई। वो उस समय घर पर ही थे। मैंने घंटी बजाई तो उन्होने मुझे अन्दर बुला लिया। मैंने उन्हें बताया कि उनके यहाँ नौकरी के लिए आई हूं।

उन्होने मुझे मुझे गौर से देखा और कुछ प्रश्न पूछे … फिर बोले,”कितना वेतन लोगी?”

“जी … जहां मैं काम करती थी वहां मुझे २५०० रुपये मिलते थे !”

“अभी ३००० दूंगा … फिर काम देख कर बढ़ा दूंगा … तुम्हें खाना और रहना फ़्री है … जाओ पीछे सर्वेन्ट क्वार्टर है।” उन्होने चाबी देते हुए कहा “सफ़ाई कर लेना … आज से ही काम पर आ जाओ !”

मेरी तो जैसे किस्मत ही जाग गई। किराये के मकान का खर्चा बच गया और खाना मुफ़्त ! फिर ३००० रुपये तनख्वाह। मैं तुरन्त चाबी ले कर पीछे गई, ताला खोला तो शानदार दो कमरे का मकान, सभी सुविधायें मौजूद थी। मैंने जल्दी से सफ़ाई की और घर आकर जो थोड़ा सा सामान था, दिन को शिफ़्ट कर लिया। मेरा ५ साल का एक लड़का और मैं … और इतना बड़ा घर !

सेठ जी काम पर जा चुके थे। पर घर में ताला था। शाम को जब सेठ जी आये तो मैं उनके पास गई। उन्होंने सारा काम बता दिया। विक्रम सेठ कोई ३५ साल के थे। और मधुर स्वभाव के थे।

मैंने झटपट शाम का खाना बनाया … मेरा खाना क्वार्टर में ही अलग बनता था। उसने हिदायत दी कि मुझे हमेशा नहा धो कर साफ़ रहना है … साफ़ कपड़े … बाल बंधे हुए … एक दम साफ़ सुथरे …… वगैरह। उन्होंने पहले से तैयार नये कपड़े मुझे दे दिये।

विक्रम बहुत मोटे इन्सान थे। कहते हैं कि उनकी बीवी उनके मोटापे के कारण छोड़ कर भाग गई थी। विक्रम का एक दोस्त जो उससे अमीर था और दिखता भी हीरो की तरह था … उसकी रखैल बन कर अलग मकान में रहती थी। विक्रम सेट एकदम अकेले थे।

विक्रम सेठ को अब मैं विक्रम कह पर ही सम्बोधित करूंगी। विक्रम को जिम जाते हुए २ महीने हो चुके थे। उनका मोटापा अब काफ़ी कम हो चुका था। शरीर गठ गया था। मैं भी अब अब उनकी ओर आकर्षित होने लगी थी। औरत मर्द की जरूरत है, ये मैं जानती थी। मेरा ज्यादातर समय खाली रहने में ही गुजरता था। खाली दिमाग शैतान का घर होता है।

मैं भी भरपूर जवान थी। मेरे स्तन भी पुष्ट थे और पूरा उभार लिये हुए थे। मेरा जिस्म भी अब कसमसाता था। रह रह कर मेरे उरोज़ कसक जाते थे। रह रह कर अंगड़ाइयां आने लगती थी, कपड़े तंग से लगते थे। मेरे आगे और पीछे के निचले भाग भी अब शान्त होने के लिये कुछ मांगने लगे थे।

एक बार रात को लगभग १० बजे मुझे ख्याल आया कि मुख्य गेट खुला ही रह गया है। सोने से पहले मैं जब बाहर निकली तो मैंने देखा कि विक्रम की खिड़की थोड़ी सी खुली रह गई थी। मैंने यूं ही अन्दर झांका तो मेरे बदन में जैसे चींटियां रेंगने लगी।

naukrani banke chud gayi desi sex story
गज़ब की मस्ती चढ़ी थी मुझपे

विक्रम बिलकुल नंगा खड़ा था और कुछ देख कर मुठ मार रहा था। मैं वहीं खड़ी रह गई। मेरा दिल धक धक करने लगा था। शायद वो कोई ब्ल्यू फ़िल्म देख रहा था और मुठ मार रहा था। मेरा हाथ बरबस ही चूत पर चला गया और दबाने लगी। मेरी चूत गीली होने लगी … जहाँ मैं चूत दबा रही थी वहाँ पेटीकोट गीला हो गया था।
उसके मुँह से वासना भरी गालियाँ निकल रही थी। चोद साली को और चोद … मां चोद दे इसकी … हाय। …

भोसड़ी के क्या लण्ड है … ऐसा ही मुँह से अस्पष्ट शब्द बोले जा रहा था। फिर उसके मुँह से आह निकल गई और उसके लण्ड से लम्बी पिचकारी निकल पड़ी। वीर्य लण्ड से झटके खा खा कर निकल रहा था।

मेरा दिल डोलने लगा। मेरी छाती धड़कने लगी। पसीने की बून्दें छलक आई। मैं वहां से हट कर मुख्य द्वार को बन्द कर आई।

उस रात मुझे नीन्द नहीं आई। बस करवट बदलती रही। चुदने के विचार आते रहे। विक्रम का लण्ड चूत में घुसता नजर आने लगा था। जाने कब आंख लग गई। सुबह उठी तो मन में कसक बाकी थी।

खड़ी हो कर मैंने अंगड़ाई ली और अपने बोबे को देखा और धीरे से उसे मसलने लगी, मुझे मेरी चोली तंग लगने लगी थी और फिर ब्लाऊज के बटन बन्द करने लगी। सामने जाली वाली खिड़की से विक्रम मुझे ये सब करते हुए देख रहा था। मेरा दिल धक से रह गया। मैंने यूँ दर्शाया कि जैसे मैंने विक्रम को देखा ही नहीं। पर मुझे पता चल गया कि विक्रम मेरे अंगों का रस लेता है।

मैं भी अब छिप छिप के खिड़की से उसकी सेक्सी हरकतें देखने लगी। और फिर घर में आ कर खूब तड़पने लगती थी। कपड़े उतार फ़ेंकती थी, जिस्म को दबा डालती थी। विक्रम अब भी खिड़की पर छुप छुप कर मुझे देखता था। सिर्फ़ उसे बहकाने के लिये अब मैं भी दरवाजे पर कभी अपने बोबे दबाती और कभी चूत दबाती थी ताकि वो भी मेरी तरह तड़पे और वासना में आकर मुझे चोद दे।

पर वो मेरे सामने नोर्मल रहता था। मेरी चोली अब छोटी पड़ने लग गई थी। उरोज मसलते मसलते फ़ूलने और बड़े होने लग गये थे। एक बार तो जब वो खिड़की से देख रहा था मैंने एक मोमबत्ती ले कर उसके सामने अपनी चूत पर रगड़ ली थी।

इसी तरह छ: माह बीत गये। इसी बीच विक्रम ने मेरी तनख्वाह ५००० रुपये कर दी थी। ये सब मेरी सेक्सी अदाओं का इनाम था।

मुझे भी अब चुदने की इच्छा तेज़ होने लगी थी। इन दिनों विक्रम के जाने के बाद मैं अक्सर उनके बेडरूम में जाकर टीवी देखती थी। आज मैंने कुछ सीडी टीवी के पास देखी। मैंने यूं ही उसे उठा ली और देखने लगी। एक सीडी मुझे लगा कि ये शायद ब्ल्यू फ़िल्म है। मैंने उनमें से एक सीडी प्लेयर में लगाई और देखने लगी।

उसे देखते ही मैं तो एकदम उछल पड़ी। मेरा अनुमान सही निकला, वो ब्ल्यू फ़िल्म ही थी। मैं जिंदगी में पहली बार ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी। मेरे दिल की एक बड़ी हसरत पूरी हो गई … बहुत इच्छा थी देखने की।

सीन आते गये मैं पसीने में तर हो गई। मेरे कपड़े फिर से तंग लगने लगे, लगता था सारे कपड़े उतार फ़ेंको। मेरा हाथ अपने आप चूत पर चला गया और अपना दाना मसलने लगी। कभी कभी अंगुली अन्दर डाल कर चूत घिस लेती थी … । मेरी सांसें और धडकन तेज हो चली थी।

अचानक मैंने समय देखा तो विक्रम का लंच पर आने का समय हो गया था। मैंने टीवी बन्द कर दिया। अपने आप को संयत किया और अपने कपड़े ठीक कर लिये और डायनिंग टेबल ठीक करने लगी।

मेरी नजरें अब बदल गई थी। मर्द के नाम पर बस विक्रम ही था जिसे मैं रोज देखती थी। मैंने उसे नंगा भी देखा … मुठ मारते भी देखा … पेंसिल को खुद की गांड में घुसाते हुए भी देखा … । मेरे दिल पर ये सब देख कर मेरे दिल पर छुरियाँ चल जाती थी।

मैं अपने कमरे में जाकर कपड़े बदल आई और हल्की सी ड्रेस पहन ली, जिससे मेरे उरोज और जिस्म सेक्सी लगे। मैं वापस आ कर विक्रम का इन्तज़ार करने लगी। विक्रम ठीक समय पर आ गया।

आते ही उसने मुझे देखा और देखते ही रह गया। वो डायनिंग टेबल पर बैठ गया। मैं झुक झुक कर अपने बोबे हिला कर खाना परोसने लगी। वो मेरे ब्लाऊज में बराबर झांक रहा था। मेरे बदन में कंपकंपी छूटने लगी थी। अब मैं उसे जवान और सेक्सी नजर आने लगी थी।

मैंने उसके पीछे जा कर अपने बोबे भी उससे टकरा भी दिये, फिर मैं भी सिहर उठी थी। उसने अपना खाना समाप्त किया और अपने कमरे में चला गया। मैं उसे झांक कर देखती रही। अचानक उसकी नजर सीडी पर पड़ी और वो पलक झपकते ही समझ गया।

विक्रम अपने बिस्तर पर लेट गया और आंखें बन्द कर ली। विक्रम के मन में खलबली मची हुई थी। मुझे लगा कि विक्रम काफ़ी कुछ तो समझ ही गया है।

मैं उसके बेडरूम में आ गई। कही से तो शुरु तो करना ही था,”सर मोजे उतार दूँ?”
“ह … हां … उतार दो … और सुनो क्या तुम मेरी कमर दबा सकती हो … ?” उसने मुझे पटाने की एक कोशिश की। मेरा दिल उछल पड़ा। मुझे इसी का तो इन्तज़ार था।
मैंने शरमा कर कहा,”जी … दबा दूंगी … !”

मुझे कोशिश करके आज ही उसे जाल में फांस लेना था और अपनी चूत की प्यास बुझा लेनी थी। आखिर मैं कब तक तड़पती, जब कि विक्रम भी उसी आग में तड़प रहा था। विक्रम ने अपनी कमीज उतार दी।

इतने में बाहर होर्न की आवाज आई। मुझे गुस्सा आने लगा। मेरा बेटा सचिन स्कूल से आ गया था। कही गड़बड़ ना हो जाये, या मूड बदल ना जाये।

“सर … मैं अभी आई … !” कह कर मैं जल्दी से बाहर आई और सचिन को कहा कि वो खाना खा ले और फिर आराम कर ले। मैं सेठ जी को लन्च करा कर आती हूँ। उसे सब समझा कर वापस आ गई।

विक्रम ने अपना ढीला सा पजामा पहन लिया था और उल्टा लेटा हुआ था। मैंने तेल की शीशी उठाई और बिस्तर पर बैठ गई। मैंने तेल उसकी कमर में लगाया और उसे दबाने लगी। उसे मजा आने लगा। मैं उसे उत्तेजित करने के लिये उसकी चूतड़ों की जो थोड़ी सी दरार नजर आ रही थी उस पर भी तेल लगा कर बार बार छू रही थी।

“रानी … तेरे हाथों में जादू है … जरा नीचे भी लगा दे … ” मैं समझ गई कि वो रंग में आने लगा है। गर्म लोहे पर चोट करनी जरूरी थी, वरना मौका हाथ से निकल जाता।

मैंने कमर से थोड़ा नीचे दरार के पास ज्यादा मलना शुरू कर दिया, और अपना हाथ उसके चूतड़ के उभारों को भी लगा देती थी। मुझे लगा कि उसका लण्ड अब बिस्तर से दब कर जोर मार रहा है। उसके जिस्म की सिहरन मुझे महसूस हो रही थी। मौका पा कर इस स्थिति का मैंने फ़ायदा उठाया।

मैंने कहा,”सर अब सीधे हो जाओ … आगे भी लगा देती हूं … !” जैसे ही वो पलटा, उसका तन्नाया हुआ लण्ड सामने खड़ा हुआ आ गया।

मैं सिहर उठी,”हाय राम … ! ये क्या … !” मैंने अपना चेहरा छिपा लिया।

विक्रम ने कहा,”सॉरी रानी … ! मेरे जिस्म पर सात-आठ महीने बाद किसी औरत का हाथ लगा था … इसलिये भावनायें जाग उठी !” उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।

“सर जीऽऽऽ … शरम आती है … मैंने भी किसी मर्द को बहुत समय से छुआ ही नहीं है … !” मैंने आंखों पर से हाथ हटा लिया … और जैसे हामी भरते हुये विक्रम का साथ दिया।

“फ़िल्म कैसी लगी थी … मजा आया … ?”

“ज् … जी … क्या कह रहे है आप … ?” मैं सब समझ चुकी थी … मैं जानबूझ कर शरमा गई। बस विक्रम की पहल का इन्तज़ार था, सो उसने पहल कर दी। मेरी चूत फ़ड़क उठी थी। मैंने अपना हाथ नहीं छुड़ाया … वह मेरा हाथ खींच कर अपने और समीप ले आया।

मेरा बदन थरथरा उठा। चेहरे पर पसीना आ गया। मेरी आंखें उसकी आंखों से मिल गई … मैं होश खोने लगी … अचानक मेरी चूंचियो पर उसके हाथ का दबाव महसूस हुआ … वो दब चुकी थी … मैं सिमट गई,”सर प्लीज …! नहीं … मैं मर जाऊंगी …! “

विक्रम ने तकिये के नीचे से एक पांच सौ का एक पत्ता मेरी चोली में घुसा दिया। पांच सौ रुपये मेरे लिये बड़ी रकम थी … मैं पिघल उठी। मेरा कांपता जिस्म उसने भींच लिया। मैंने अपने आप को उसके हवाले कर दिया।
“पसीना पोंछ लो !” उसने चादर के एक कोने से मेरा चेहरा पोंछ दिया और मेरे नरम कांपते होंठ को उसने अपने होंठों से दबा लिये। मेरी इच्छा पूरी हो रही थी। पैसे भी मिल रहे रहे थे और अब मैं चुदने वाली थी। मेरा शरीर वासना की आग में सुलग उठा। चूत पानी छोड़ने लगी, शरीर कसमसाने लगा। उसके बलिष्ठ बाहें मुझे घेरने लगी। मेरा हाथ नीचे फ़िसलता हुआ उसके लण्ड तक पहुंच गया।

मैंने इज़ाज़त मांगी … “सर … छोटे साहब को … ?”

“रानी … मेरी रानी … जरा जोर से थामना … कहीं छूट ना जाये …!” उसने अपने लण्ड को और ऊपर उभार लिया। मेरा हाथ उसके लण्ड कर कस गया। उसने मुझे एक ही झटके में बिस्तर पर खींच कर पटक दिया। और सीधे मेरी चूत पर वार किया। मेरी चूत को हाथ अन्दर डाल कर दबा दी। मैं तड़प उठी। वो चूत मसलता ही गया। मैं छटपटाती ही रही। पर उसका हाथ अलग नहीं हटाया।

“हाऽऽऽय … रे … सर जी … मर गई … क्या कर रहे हो … आऽऽह … माई रे … ” मेरी खुशी भरी तड़पन उसे अच्छी लगने लगने लगी।

“कहां थी तू अब तक रे … क्या मस्त हो रही है … ” विक्रम नशे में बोला। मेरी चूत दबा कर कर मसलता रहा … पर ये ५०० रुपये का नशा भी साथ था … उसकी इच्छा मुझे पूरी जो करनी थी। मेरे सारे कपड़े एक एक कर उतरते जा रहे थे। हर बार मैं जानकर नाकाम विरोध करती …!
अन्तत: मैं वस्त्रहीन हो गई। मेरी चूंचियाँ बाहर छलक पड़ी … मेरा नंगा जिस्म चमक उठा। मैंने नशे में अपनी आंखे खोली तो विक्रम का बलिष्ठ शरीर नजर आया … जिसे मैं छुप छुप कर कितनी बार देख चुकी थी। उसका चेहरा मुझे अपनी चूत की तरफ़ झुकता नजर आया। मेरी क्लीन शेव चूत की पंखुड़ियों के बीच रिसता पानी उसे मदहोश करने लगा।

उसकी जीभ का स्पर्श मुझे कंपकपाने लगा।

मैंने सिसकारी भरते हुए कहा,”सर … नहीं प्लीज … मत करिये … ” पर उसने मेरी टांगों को चीर कर चूत और खोल दी और उसके होंठ मेरी चूत से चिपक गये … मैंने अपनी चूत मस्ती में और उभार दी।

“रानी … ना ना करते पूरी चुद जाओगी … ” कह कर उसने चूत पर जीभ गहरी घुसा कर निकाल ली … मैं उत्तेजना से कसमसा उठी। अब मेरा दाना और चूत दोनों ही जीभ से चाट रहा था। बहुत साल बाद मुझे फिर से एक बार ये सुख मिल रहा था।

उसने मुझे घुमा कर उल्टी कर दिया और चूतड़ों को थपथपाने लगा। यानि अब मेरी गांड की बारी थी … ! मेरा दिल खुशी के मारे उछल पड़ा। गाण्ड चुदवाना मेरा पहला शौक रहा है उसके बाद फिर चूत की चुदाई का आनन्द … !”

“सर नहीं ये नहीं … प्लीज … मेरी फ़ट जायेगी !” मैंने अपने नखरे दिखाए … पर ये क्या … विक्रम ने एक ५०० का नोट और लहरा दिया …

“ये इस प्यारी गाण्ड चुदाई के मेरी रानी … !” मैं और पिघल उठी … मेरे मन चाहे काम के अब मुझे १००० रुपये मिल चुके थे, इससे ज्यादा और खुशी क्या हो सकती थी। विक्रम ने थूक का एक बड़ा लौंदा मेरे चूतड़ो को चीर के छेद पर टपका दिया। और उछल कर मेरी पीठ पर चढ़ गया … कुछ ही देर में उसका लण्ड मेरी गांड के छेद में घुस चुका था। दर्द झेलना तो मेरी आदत बन चुकी थी।

“आह रे … घुस गया सर … !”

” रानी तू कितनी अच्छी है … पहले कहां थी रे … !”

“आप ही ने मुझ गरीबन पर ध्यान नहीं दिया … हाय गाण्ड चुद गई रे … !”

” रानी … मैं तुझे रानी ही बना कर रखूंगा … तूने तो मुझे खुश कर दिया है आज … !”

धचक धचक लण्ड घुसता रहा … मेरी गाण्ड चुदती रही … आज मेरी गाण्ड को लण्ड का प्यारा प्यारा मजा मिल गया था। मैं विक्रम की अहसानमन्द हो चुकी थी। मैंने भी अब थोडी सी मन की करने की सोची … और कहा,”सर … आप कहे तो मैं अब आपको चोद दूँ …?”

“कैसे … आदमी कैसे चुद सकता है … ?”

“आप बिस्तर पर सीधे लेट जाईए … मैं आपके खड़े लण्ड पर बैठ कर आपको चोदूँगी … ” विक्रम हंस पड़ा।
“छुरी तरबूज पर पड़े या तरबूज छुरी पर … चुदेगी तो चूत ही ना … ” मैं शरमा गई।

“हटो जी … आ जाओ ना … !”विक्रम नीचे लेट गया … उसका खड़ा लण्ड मेरी चूत को चुनौती दे रहा था। मैं धीरे से उसके लण्ड पर निशाना लगा कर बैठ गई। पर विक्रम को कहाँ चैन था। उसने नीचे से ही अपने चूतड़ उछाल कर मेरी चूत को लपेटे में ले लिया और चूत को चीरता हुआ लण्ड अन्दर घुस पड़ा।

मेरा बेलेन्स गड़बड़ा गया और धच्च में लण्ड पर पूरी बैठ गई। मेरे मुख से चीख निकल पड़ी। लण्ड चूत की पूरी गहराई पर जाकर गड़ चुका था। मेरी चूत से थोडा सा खून निकल पड़ा। मैंने अंगुली से देखा तो लाल रंग … पर ये तो लड़कियों के साथ चुदाई में साधारण सी बात होती है। पर विक्रम घबरा उठा,”अरे … ये क्या … खून … सॉरी … !”

मैंने उसके होंठो पर अंगुलि रख दी … “चुप रहो न … करते रहो … !”

पर इसका मुझे तुरन्त मुआवजा मिल गया … एक ५०० रुपये का नोट और लहरा उठा। ये विक्रम क्या कर रहा है? १५०० रुपये मेरे लिये बहुत बड़ी रकम थी।

“नहीं चाहिये मुझे …” पर उसने मुझे दिये हुए नोटो के पास उसे रख दिया। हमारा कार्यक्रम आगे बढ़ चला … अब मुझे पूरी जी जान से उसे सन्तुष्ट करना ही था। मैंने अपनी चूत अन्दर ही अन्दर सिकोड़ ली और टाईट कर ली … फिर उसके लण्ड को रगड़ना शुरू कर दिया। टाईट चूत करने से मेरी चूत को चोट भी लग रही थी … पर विक्रम को तंग चूत का मजा आने लगा था।

पर नतीजा … मैं चरमसीमा पर पहुंच गई … साथ ही विक्रम भी अपना शरीर लहराने लगा।

“मेरी जानु …मेरी जान … मैं तो गया … निकला जा रहा है अब … रानीऽऽऽ हाय … ऊईईईऽऽऽऽ ” विक्रम के साथ साथ मेरा भी रस निकलने लगा … उसका लण्ड भी मेरी चूत में अपना वीर्य छोड़ने लगा। हम दोनो आपस में लिपट पड़े। मैं तो पूरी झड़ चुकी थी … उसका वीर्य को मेरी चूत में लिपट कर निकालने का मौका दे रही थी … कुछ ही देर में हम दोनो निढाल पड़े थे।

विक्रम उठा और पास में पड़ा तौलिया लपेट कर बाथरूम में चला गया। मुझे भी कुछ नहीं सूझा तो मैं भी उसी के साथ बाथरूम में घुस गई और पानी से अपनी चूत और लगा हुआ वीर्य साफ़ करने लगी।

“आज तो रानी … तुमने मेरी आत्मा को प्रसन्न कर दिया … अब एक काम करो … सामने ब्यूटी पार्लर में जाओ और उससे कहना कि मैंने भेजा है … ”

मैं सर झुकाये बाहर आकर कपड़े पहनने लगी। और नोट गिन कर अपने ब्लाऊज में सम्हाल कर रखने लगी। पर ये क्या … विक्रम ने झटके मेरे हाथों से सारे नोट ले लिये …

“क्या करोगी इनका … ये तो कागज के टुकड़े हैं … ” मेर दिल धक से रह गया … मेरे होश उड़ गये, रुपये छिनने से मुझे ग्लानि होने लगी।

पर दूसरे ही क्षण मेरे चेहरे पर दुगनी खुशी झलक उठी। विक्रम ने अलमारी खोल कर गहने मेरी ओर उछाल दिये,”सजो मेरी रानी … आज से तुम मेरी नौकरानी नहीं … घरवाली की तरह रहोगी … और रहे रुपये ! तो ये सब तुम्हारे है …!

———–समाप्त———–

सो दोस्तों, कैसी लगी आपको ये मेरी desi sex story? कमेंट्स करके बताओ न..



loading...

और कहानिया

loading...


Online porn video at mobile phone


chot marel xxx saxy Antervasna sasur n apne dosto s jaberdasti chudwauahot saxi gand khaneya doka new newhindikhanixxxvideos.comमस्ताराम गे नेट सेक्स कहानीjawan nokrani sixy anty ki chut fod dali xxxchut chuskar usme land se sex videoXxx lund ki bhuki randi aurad videoschut dahie Aurat xxx compadosan unkal ne momi kichodyhinde grup sex storyfacebook se maa tak hindi sex storyma.byta.drti.hindi.sexstoriesसामुहीक चुदायmom aur mera bachpan sexy kahaniwww sex kahaniyag comhot sex stories. land chut chudayiki sex kahaniya com/bktrade. ru/page no 1to 179kamukta baapपहाडि दादा दादि कि सेकश कहानिया divya babe xxx khneसिकसी।खोला।बिडीsexy ladki pase lakar ladko se sex krti jor jor se sex storyhot sex call boy new story antarvasnaaaji barobar natvane kela sexeचुदायी के वीडीयीbhai ne lund dikhakar pataker choda sex story in hindixxx choti bahan chota bhai sac Karuna ki videshi se chudai Ki kahanimaa ki chut ka bhosdaबनाया withpicrajwap sxs stori hndiचूदाई विडीयोchudai kahani manju chaceri bahen hindidehatisexstroy.comगाड हिलते xxxसगी अदला बदल चडाई कहानियाँAurat ladkaHindixxxbahut teji se rep kiya bahan ka khoon nikal gaya rep sexy story hindi mepussy dikhakar chudaiki sex khaniचिकनि चुतबुर एंड लॉउन्ड स्टोरी इसindan ma bata xxx kahanemacale mane sxxxhile xxx bhu hine hindexxxsaree bra panty suhagraat bur fat gayi video mastram kee kahane.comkamukata dot com hindibhai boner rape sex kahani banglayxxx gruop जंगल में मंगलबीवी बडा लंड लेना चहती हैbahut ho i so jay xxxxx.kahani.bade.aksar.meinkhani sexpehili bar sex karte samaya kya hoti thi xnxxchutkikahanihidihindi.fudi.sxxx.hindisxxxdidiko bayfriendke sath pakdahindi romanticsex kahaniyhotbebe ke cudae padose ke sat sexजूली को चोदाdost ki mom or waife ko nigro bankr choda hindi sex storyBoss na kuvare didi ke kahanichut fadd ke gangbang kia sex story in hindiसुहागरात कहानियाभाइ ने बहान की बुर की चोदईकी हिनदी विडीयोसभाई भान xxx videos बातरूम मेporn ki kahaniaudio story chote ldke ne muje chodauje choda1993 ki kamukta comhindi kahani ladki janwar se chudaiअनमोल रिश्ता में चुदाईindan ma bata xxx kahanekheto pr nani or ma ko choda